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बचà¥à¤šà¥‡ का विकास
आमतौर पर गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ के 35वें सपà¥â€à¤¤à¤¾à¤¹ में 18 इंच लंबा और वजन लगà¤à¤— पांच से छह पाउंड होता है। लेकिन हमेशा इन आंकड़ों को सही नहीं माना जा सकता। इस हफà¥à¤¤à¥‡ तक बचà¥â€à¤šà¥‡ के अंगों का विकास पूरी तरह से हो जाता है। इस दौरान जिगर और गà¥à¤°à¥à¤¦à¤¾ अपशिषà¥â€à¤Ÿ पैदा करना शà¥à¤°à¥‚ कर देते है और गरà¥à¤à¤¾à¤¶à¥â€à¤¯ में बचà¥â€à¤šà¥‡ की घूमने की जगह को कम कर देता है। इसके चलते आपको बचà¥à¤šà¥‡ की हलचल कम देखने को मिल सकती है।
बचà¥à¤šà¥‡ के जनà¥à¤® के समय समय उससे बातें करना बहà¥à¤¤ ही अचà¥à¤›à¤¾ होता है। यह समय बचà¥à¤šà¥‡ से बात करने के लिठसबसे उतà¥à¤¤à¤® माना जाता है। यह जनà¥à¤® से पहले आपसी संबंधों को मजबूत करता है। à¤à¤¸à¤¾ करने से जब जनà¥à¤® के बाद वे आपकी आवाज सà¥à¤¨à¤¤à¥‡ हैं तो उस पर पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ देते हैं। बचà¥à¤šà¥‡ से बात करने के लिठतà¥à¤¤à¤²à¤¾à¤¹à¤Ÿ में बात करना बहà¥à¤¤ ही अचà¥à¤›à¤¾ होता है। यह देखने में मूरà¥à¤–तापूरण तो लगता है लेकिन इस तरह तà¥à¤¤à¤²à¤¾à¤¹à¤•र बात करने से बचà¥à¤šà¤¾ आपकी बातों का जवाब अधिक देता है।
35वें सपà¥â€à¤¤à¤¾à¤¹ पैदा होने वाले बà¥à¤šà¥à¤šà¥‹à¤‚ की जिंदा रहने की संà¤à¤¾à¤µà¤¨à¤¾ 99 फीसदी तक होती है और उनकी तंतà¥à¤°à¤¿à¤•ा तंतà¥à¤° और संचार पà¥à¤°à¤£à¤¾à¤²à¥€ पूरी तरह काम करना शà¥à¤°à¥‚ कर देती है। इसके अलावा बचà¥à¤šà¥‡ के फेफड़ों का विकास à¤à¥€ 99 पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤¶à¤¤ तक हो जाता है।
कà¥à¤¯à¤¾-कà¥à¤¯à¤¾ परिवरà¥à¤¤à¤¨ हो सकते हैं-
गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ के 35वें सपà¥à¤¤à¤¾à¤¹ में आपका वजन लगà¤à¤— 24 से 29 पाउंड तक बढ़ सकता है। इस दौरान गरà¥à¤à¤¾à¤¶à¤¯ नाà¤à¥€ से लगà¤à¤— 6 इंच उपर हो जाता है। बचà¥à¤šà¥‡ का सिर शà¥à¤°à¥‹à¤£à¤¿ के निचले हिसà¥à¤¸à¥‡ में जाना शà¥à¤°à¥‚ कर देता है। बà¥à¤šà¥à¤šà¥‡ की सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ में बदलाव के कारण आपको सांस लेने में थोड़ी परेशानी हो सकती है। जैसे-जैसे समय आगे बढ़ेगा बचà¥à¤šà¤¾ अपने सà¥à¤¥à¤¾à¤¨ में थोड़ा-थोड़ा परिवरà¥à¤¤à¤¨ करेगा। जिससे आपको सांस लेने की तकलीफ ही ठीक हो जाà¤à¤—ी।
बचà¥à¤šà¥‡ की शà¥à¤°à¥‹à¤£à¤¿ में जाने की पà¥à¤°à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ को लाइटनिंग कहते हैं। इस सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ में आपको बार-बार पेशाब आना और शà¥à¤°à¥‹à¤£à¤¿ कà¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤° में à¤à¥à¤¨à¤à¥à¤¨à¥€ à¤à¥€ महसूस होना सामानà¥à¤¯ है। à¤à¤¸à¤¾ शà¥à¤°à¥‹à¤£à¤¿ नसों पर दबाव के कारण होता है। इससे राहत पाने के लिेठआप केजेल वà¥à¤¯à¤¾à¤¯à¤¾à¤® का अà¤à¥à¤¯à¤¾à¤¸ शà¥à¤°à¥‚ कर सकते हैं। इससे आपको सांस लेने में आराम मिलेगा। शà¥à¤°à¥‹à¤£à¤¿ कà¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤° पर दबाव पड़ने पर आपको पैर में दरà¥à¤¦ महसूस हो सकता हैं। गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ के इस समय के दौरान आपको जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ न चलने और तैराकी से दूर रहने की सलाह à¤à¥€ दी जाती है।
इस समय के दौरान आपको जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ मेहनत वाले काम से बचने की सलाह दी जाती है। आरामदायक सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ में नींद लेने की कोशिश करें और जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ से जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ आराम करें। गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ के इस सà¥à¤¤à¤° पर आपको सà¥à¤¤à¤¨à¥‹à¤‚ का आकार बदलना, कबà¥à¤œ, थोड़े-थोड़े समयमें टॉयलेट जाना, अपच और बवासीर जैसे लकà¥à¤·à¤£ देखने को मिल सकते हैं।
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